चाँद का कंचा, रात की गुच्चक
दोनों आंखें टीम हमारी
6.11.09
22.10.09
आद्या के लिए
सुबह एक दोस्त मिला,
बोला,
"बड़े खुश दीखते हो ड्यूड,
तारे तोड़ लाये हो क्या ?"
"तारे नहीं, पूरा चाँद,"
मैंने कहा,
"तोड़ के घर में सजा लिया है,
अब यहीं रहेगा,
शाम घर आना
देखने"
बोला,
"बड़े खुश दीखते हो ड्यूड,
तारे तोड़ लाये हो क्या ?"
"तारे नहीं, पूरा चाँद,"
मैंने कहा,
"तोड़ के घर में सजा लिया है,
अब यहीं रहेगा,
शाम घर आना
देखने"
24.8.09
संगत का असर
बहुत दिन से
चुप है ज़िन्दगी
न खास शिकवे-शिकायत
न ज्यादा हील-ओ-हुज्जत
सुधर गयी है शायद
तेरी संगत पा कर
चुप है ज़िन्दगी
न खास शिकवे-शिकायत
न ज्यादा हील-ओ-हुज्जत
सुधर गयी है शायद
तेरी संगत पा कर
17.8.09
River Oblivion
Yesterday, I scraped my knee
9 years ago, my heart
Almost died
Almost lived
Confined 35 monsoons
3 cities
And as many Kumbh Melas
To the dusty attic
of my memory
All this while
Constellations traversed the night
And Ganga lashed relentlessly
against the ghats of Haridwar
Oblivious
of me
9 years ago, my heart
Almost died
Almost lived
Confined 35 monsoons
3 cities
And as many Kumbh Melas
To the dusty attic
of my memory
All this while
Constellations traversed the night
And Ganga lashed relentlessly
against the ghats of Haridwar
Oblivious
of me
4.6.09
मैंने सोचा
रिश्ते नाते दोस्ती प्यार
कोरे शब्द, निरर्थक, बेकार
केवल दुनियादारी-व्यवहार
मैंने सोचा
जाते हैं तो जाएँ मेरी बला से
जी लेंगे अकेला
या ढूँढ लेंगे कोई दूजा
मैंने सोचा
स्वयं ही सत्य है, बस
एकाकी है हर कोई, भीतर
बाकी सब दिल का बहलाना, बहाना
मैंने सोचा
फ़िर मिले तुम, अनायास
ज़िन्दगी ने लगाया व्यंग्य भरा ठहाका
बोली- सब समझते हो, है ना?
कान पकड़े, खिसियाया
गलत थी शायद अब तक मेरी सोच
मैंने सोचा
कोरे शब्द, निरर्थक, बेकार
केवल दुनियादारी-व्यवहार
मैंने सोचा
जाते हैं तो जाएँ मेरी बला से
जी लेंगे अकेला
या ढूँढ लेंगे कोई दूजा
मैंने सोचा
स्वयं ही सत्य है, बस
एकाकी है हर कोई, भीतर
बाकी सब दिल का बहलाना, बहाना
मैंने सोचा
फ़िर मिले तुम, अनायास
ज़िन्दगी ने लगाया व्यंग्य भरा ठहाका
बोली- सब समझते हो, है ना?
कान पकड़े, खिसियाया
गलत थी शायद अब तक मेरी सोच
मैंने सोचा
15.5.09
अपना चाँद

सूना पहलू सूनी सेज, दूर देस क्यूँ बैठा चाँद
आ जा कितने बरस गए, तू भी होगा तन्हा चाँद
सूनी आँखें बैरी नींद, कैसे देखूँ सपना चाँद
कोई रास नहीं आता, जब से हुआ तू अपना चाँद
झिलमिल मेरी तलैया थी, उस में तेरी छैया थी
अब किस से खेलूँगा मैं, ले गया अपनी छैया चाँद
सो जा तू साजन सो जा, मेरे सपनों में खो जा
रात डूबने वाली है, तड़के घर लौटेगा चाँद
1.5.09
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