16.11.11

समय के टैंक

रिश्ते
वाकये
साम्राज्य
इंक़लाब 
फ़लसफ़े
बलिदान
नाइंसाफियां
कुचले जाते हैं सब
समय के टैंक के पहियों तले
नहीं रुकता वो, बढता जाता है
बाद में धूल छानो तो
मिलती हैं
टूटी-फूटी
कहानियां





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सुना वो आज़ भी लिख लेता है
उस में कुछ भूख बची होगी अभी

भूख ज़िंदा तो लफ्ज़ भी ज़िंदा





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आजकल सोच भटकती है कम
पकड़ के लीक सीधा सा चले मन

लगे है बूढ़ा हो चला शायद

6.8.11

मन, आसमान, सूरज , रात


रात अंगारों सा सुलगता है राख के भीतर 
सारे दिन फिर इसे सूरज ने जलाया कल भी 
जैसे कागज़ था कोई रखा लेंस के नीचे
पड़ गया काला, हाशियों पे बस
बची चिंगारियों सी शाम सुलगती है अब 

मेरा मन आसमान जैसा है


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दो उजले सफेद पन्नों के बीच में रखी
एक कार्बन पेपर जैसी काली रात




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लाल चटख सा एक सूरज हुआ बरामद आज सुबह
उस गुदड़ी से रात जिसे ओड़ के सोया आसमान था

27.7.11

गो समझदार ये होता तो समझ ही लेता 
हमने तो ख़ूब इशारे किये अपने दिल को

दुहरा कर के पुर्ज़ा-पुर्ज़ा कर देती
याद तुम्हारी चिठ्ठी होती जो किसना

26.6.11

कुछ ख्याल

आ, बादल से बादल टकरायें,
थोड़ी बारिश छलकायें,
और गरज के बोलें-
चीअर्स!





सुनो, तुम जब जाते हो,
पीछे ज़िंदगी के आकार का एक खालीपन छोड़ जाते हो.




कच्चे करोंदे के चख जैसा- तेरा बोसा


बच्चे की अंजली में गंगाजल सी- तेरी आँखें

27.5.11

देखो तो आसमान में बिखरी हुई रुई
तारों ने रात जम के पिल्लो-फाइट की होगी

26.4.11

निरंतर

गाली दे कर बात करते थे
गंदे लतीफे सुना सुना हँसते थे 
सस्ती शराब बिना सोडे पी जाते थे
फिर फटे बांस सी आवाज में ग़ज़ल सुनाते थे
अब वक़्त के दरिया ने उन्हें घिस कर पोलिश्ड बना दिया है
वो रूखे पहाड़ी पत्थरों से मेरे पुराने दोस्त

अतीत की एल्बम

अतीत के आले में, मरफी के रेडियो के पीछे
एक पुराना ब्लैक एंड वाईट एल्बम रखा है
थोड़ी फ़ुर्सत मिले तो उसे निकालूं और मोड़े पे
पीठ टिका माँ-पापा को नए सिरे से जानूं

8.1.11

धुंध की मीनार

यहाँ पत्थर की लकीरों से वादे न करो
रिश्ते तो धुंध की मीनार हुआ करते हैं

यूँ तो हर दर किसी दीवार से निकलता है
और कभी रस्ते भी दीवार हुआ करते हैं

जिन्हें दुनिया की कोई गर्ज़ नहीं होती है
बड़े दिलचस्प वो किरदार हुआ करते हैं

तनहा तनहा

कहने को जंगल कहते हैं
हर पेड़ मगर तनहा तनहा

यूँ चले सदा काफ़िलों में
पर कटा सफ़र तनहा तनहा

कभी वीराने जशनों से लगें 
कभी जलसाघर तनहा तनहा

दो बात हमें भी करनी हैं
कभी मिलो अगर तनहा तनहा

अपनी संगत रब की संगत
मैं और सागर तनहा तनहा

जो यारों का था यार बड़ा
उसकी भी कबर तनहा तनहा

हम भीगे थे तनहा तनहा
बरसा बादर तनहा तनहा